हरियाली तीज 2025: प्रेम, सौभाग्य और प्रकृति का पावन पर्व
भारत में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पर्व देवी पार्वती और भगवान शिव के पवित्र मिलन की स्मृति में मनाया जाता है।
📅 तिथि और समय
तारीख: रविवार, 27 जुलाई 2025
तृतीया तिथि: 26 जुलाई रात 10:41 बजे से 27 जुलाई रात 10:41 बजे तक
🌿 पौराणिक महत्व
देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तप किया था। श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इस दिन को नारी शक्ति, सौंदर्य, और वैवाहिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
🙏 पूजा विधि
- सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
- शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित करके पूजा करें।
- पूजन में फूल, अक्षत, फल, जल, वस्त्र, और भोग अर्पित करें।
- व्रत कथा सुनें और रात्रि को व्रत खोलें।
🌸 सिंधारा और श्रृंगार
मायके से विवाहित बेटियों को सिंधारा भेजा जाता है, जिसमें कपड़े, मिठाई, मेहंदी और चूड़ियाँ होती हैं। महिलाएँ 16 श्रृंगार करके उत्सव मनाती हैं।
💃 झूला, गीत और लोक संस्कृति
पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं, महिलाएँ पारंपरिक गीत गाती हैं और समूह में नृत्य करती हैं। यह प्रकृति और सौंदर्य का जीवंत उत्सव होता है।
🍬 पारंपरिक व्यंजन
घेवर, गुझिया, शक्करपारे, और पूरियाँ खास तौर पर इस दिन बनती हैं।
🌦️ प्रकृति का उत्सव
यह पर्व हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और वर्षा ऋतु के सौंदर्य को समर्पित है। यह हमें प्रकृति से जुड़ने और उसका आदर करने की प्रेरणा देता है।
✨ निष्कर्ष
हरियाली तीज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि नारी सम्मान, प्रेम, समर्पण और प्रकृति चेतना का उत्सव है। आइए 27 जुलाई 2025 को हम सभी इस पर्व को श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक भावना के साथ मनाएँ।