दीवाली के त्योहार पर क्या-क्या तैयारियाँ होती हैं

8/25/2025 10:44:51 AM, Aniket

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🪔 दीवाली के त्योहार पर क्या-क्या तैयारियाँ होती हैं

भारत में त्योहार सिर्फ खुशी का ही प्रतीक नहीं होते बल्कि यह एक दूसरे से जुड़ाव और संस्कृति की गहराई को भी दर्शाते हैं। इन्हीं त्योहारों में सबसे खास है दीवाली, जिसे प्रकाश पर्व भी कहा जाता है। अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का यह पर्व हर भारतीय के दिल में विशेष स्थान रखता है। दीवाली की तैयारियाँ कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। घर की सफाई से लेकर पूजा-पाठ और मिठाइयों से लेकर उपहारों तक, हर तैयारी में खुशी और उत्साह झलकता है। आइए जानते हैं कि इस शुभ पर्व पर कौन-कौन सी तैयारियाँ की जाती हैं।

1. घर की सफाई और सजावट

दीवाली की शुरुआत घर की सफाई से होती है। लोग मानते हैं कि स्वच्छ और सुंदर घर में लक्ष्मी माता का वास होता है। - पुराना सामान बाहर निकाल दिया जाता है।
- घर को रंगाई-पुताई करके नया रूप दिया जाता है।
- दीवारों पर सुंदर डिज़ाइन और रंग-बिरंगी पेंटिंग की जाती है।
- लाइट्स, झालरों और फूलों से घर को सजाया जाता है।

2. खरीदारी और नए सामान की तैयारी

दीवाली पर खरीदारी का भी खास महत्व है। - लोग सोने-चांदी के आभूषण खरीदते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, कपड़े और बर्तन भी खरीदे जाते हैं।
- धनतेरस से ही खरीदारी का माहौल बन जाता है, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है।

3. मिठाइयाँ और स्वादिष्ट व्यंजन

त्योहार हो और मिठाइयाँ न हों तो अधूरा लगता है। - घर में तरह-तरह की मिठाइयाँ जैसे लड्डू, बर्फी, गुलाबजामुन, रसगुल्ला और खीर बनाई जाती हैं।
- नमकीन और स्नैक्स भी तैयार किए जाते हैं ताकि मेहमानों का स्वागत किया जा सके।
- कई लोग घर पर ही मिठाई बनाते हैं ताकि शुद्धता बनी रहे।

4. पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान

दीवाली का सबसे अहम हिस्सा है लक्ष्मी-गणेश की पूजा। - पूजा के लिए घर में नया आसन, फूल, अगरबत्ती, दीपक और चांदी के सिक्के खरीदे जाते हैं।
- शाम को पूरे परिवार के साथ विधिवत पूजा की जाती है।
- मां लक्ष्मी से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
- पूजा के बाद पटाखे जलाकर खुशियाँ मनाई जाती हैं।

5. उपहार देने और रिश्तों को मजबूत करने की परंपरा

दीवाली पर लोग आपस में उपहार और मिठाइयाँ बांटते हैं। - यह परंपरा रिश्तों में मिठास घोलती है।
- दोस्त, पड़ोसी और रिश्तेदारों को गिफ्ट देकर एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान जताया जाता है।
- कंपनियाँ और ऑफिस भी कर्मचारियों को गिफ्ट हैम्पर देती हैं।

6. पटाखे और रोशनी

दीवाली रोशनी का त्योहार है। - बच्चे और बड़े सभी पटाखों का आनंद लेते हैं।
- आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठता है।
- घर-घर दीपक और मोमबत्तियाँ जलाकर वातावरण को उजाला और सकारात्मकता से भर दिया जाता है।

7. पर्यावरण की सुरक्षा का ध्यान

आजकल लोग ग्रीन दीवाली की ओर भी बढ़ रहे हैं। - कम प्रदूषण वाले पटाखे चुने जाते हैं।
- लोग पटाखों की बजाय दीप जलाने और सजावट पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
- पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती है।

8. आर्थिक और सामाजिक महत्व

दीवाली का असर सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि आर्थिक भी है। - बाजारों में सबसे ज्यादा रौनक दीवाली पर होती है।
- छोटे-बड़े दुकानदारों की आमदनी बढ़ती है।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
- साथ ही समाज में आपसी भाईचारा भी मजबूत होता है।

निष्कर्ष

दीवाली का त्योहार सिर्फ रोशनी और पटाखों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव है। इस दिन की तैयारियाँ हमें न केवल उत्साह से भर देती हैं बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने का अवसर भी देती हैं। साफ-सफाई, सजावट, खरीदारी, मिठाइयाँ, पूजा और उपहार—हर तैयारी दीवाली को और भी खास बना देती है। यही कारण है कि इसे भारत का सबसे बड़ा और सबसे खुशियों भरा त्योहार कहा जाता है।


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