जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है और इस दिन क्या हुआ था

8/13/2025 10:12:08 AM, Aniket

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जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है और इस दिन क्या हुआ था

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला यह पावन पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है—धर्म, नीति और प्रेम का सजीव संदेश।

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सामग्री

  1. जन्माष्टमी क्या है?
  2. श्रीकृष्ण जन्म की कथा
  3. आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्त्व
  4. इस दिन क्या-क्या होता है
  5. जीवन के लिए संदेश
  6. संक्षिप्त प्रश्नोत्तर

जन्माष्टमी क्या है?

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार यह पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के योग में आता है। श्रद्धालु उपवास रखते हैं, मंदिरों में झांकियाँ सजती हैं और मध्यरात्रि में जन्म आरती के साथ उत्सव चरम पर पहुँचता है।

श्रीकृष्ण जन्म की कथा

पुराणों में वर्णित है कि मथुरा के अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कैद कर रखा था, क्योंकि भविष्यवाणी हुई थी कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसका वध करेगा। कंस ने पहले छह शिशुओं को मार डाला। सातवाँ गर्भ योगमाया की लीला से रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित हुआ और वे बलराम के रूप में जन्मे।

अष्टमी की आधी रात तेज वर्षा और अँधियारे में श्रीकृष्ण जेल में प्रकट हुए। पहरेदार सो गए, बेड़ियाँ और किवाड़ स्वयं खुल गए। वसुदेव ने नवजात को टोकरी में रखा, उफनती यमुना पार की और गोकुल में नंद-यशोदा के घर पहुँचा दिया। वहाँ यशोदा के पास जन्मी बालिका को वे मथुरा ले आए; कंस ने उसे उठाया तो वह योगमाया बनकर आकाशवाणी करती हुई मुक्त हो गई।

आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्त्व

जन्माष्टमी धर्म की अधर्म पर विजय, सत्य की स्थापना और अहंकार पर प्रेम की जीत का प्रतीक है। श्रीकृष्ण का भगवद्गीता में दिया गया संदेश—कर्मयोग, भक्ति और ज्ञान—आज भी जीवन-पथ को प्रकाश देता है।

यह उत्सव भारतीय कला-संस्कृति से भी गहरे जुड़ा है—रसलीला, कथक, भजन-कीर्तन और झांकियों के माध्यम से कृष्णचरित जन-जन तक पहुँचता है।

इस दिन क्या-क्या होता है

  • मंदिर सजावट: फूल, दीप और आकर्षक झांकियों से अलंकरण।
  • झूलोत्सव: बालकृष्ण को पालने में विराजाकर झुलाया जाता है।
  • दही-हांडी (मटकी फोड़): विशेषकर महाराष्ट्र-गुजरात में मान्य, माखन-चोरी की लीला का स्मरण।
  • रात्रि जागरण: भजन, कीर्तन, भागवत/गीता पाठ और जन्म-आरती।
  • उपवास-व्रत: अनेक भक्त मध्यरात्रि तक फलाहार/निर्जल व्रत रखते हैं और जन्म के पश्चात प्रसाद ग्रहण करते हैं।

जीवन के लिए संदेश

श्रीकृष्ण का जीवन सिखाता है कि कठिनतम परिस्थितियों में भी धैर्य और विवेक न छोड़ेँ, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े रहें, और प्रेम, करुणा, निस्वार्थ सेवा को जीवन का आधार बनाएं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर

जन्माष्टमी कब मनाई जाती है?

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, रोहिणी नक्षत्र के संयोग में।

मुख्य परंपराएँ क्या हैं?

उपवास, झूलोत्सव, दही-हांडी, रात्रि जागरण, झांकियाँ और जन्म-आरती।

पर्व का मूल संदेश क्या है?

धर्म की स्थापना, प्रेम और करुणा का विस्तार, तथा कर्मयोग का अनुसरण।

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