गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

8/14/2025 10:30:32 AM, Aniket

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गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

भगवान गणेश के जन्मोत्सव का इतिहास, धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और आधुनिक समय का सांस्कृतिक प्रभाव—सब एक जगह।

गणेश चतुर्थी भारत के प्रमुख और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, जिसे हर साल बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है—वे “विघ्नहर्ता” और “सिद्धिविनायक” कहलाते हैं तथा ज्ञान, बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के अधिष्ठाता देव हैं।

1) गणेश जन्म की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसे द्वार पर पहरा देने को कहा। इस बीच भगवान शिव आए और भीतर जाना चाहा, किंतु बालक ने रोका। रुष्ट होकर शिव ने उसका सिर अलग कर दिया। पार्वती के शोक से देवलोक व्याकुल हुआ, तब शिव ने गज (हाथी) का शीश लगाकर बालक को पुनर्जीवन दिया। यही बालक गणेश कहलाए और वह दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के रूप में जन्मोत्सव माना गया।

2) धार्मिक महत्व

  • हर शुभ कार्य से पहले गणेश पूजन—सिद्धि और निर्विघ्नता का आह्वान।
  • बुद्धि, विवेक, स्मरण-शक्ति और सफल आरंभ का आशीर्वाद।
  • “विघ्नहर्ता” के रूप में जीवन की बाधाएँ दूर करने की प्रार्थना।

3) ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आधुनिक सार्वजनिक उत्सव का सूत्रपात लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में किया। औपनिवेशिक काल में सामूहिक आयोजनों पर अंकुश था; ऐसे समय में गणेशोत्सव ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रभाव को नया मंच दिया। आज भी विशेषकर महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में यह त्योहार अत्यंत भव्यता से मनाया जाता है।

4) उत्सव कैसे मनाया जाता है?

गणेश चतुर्थी सामान्यतः 10 दिनों तक चलती है। प्रथम दिवस घरों/पंडालों में मूर्ति स्थापना, वेद-मंत्र, आरती, भजन, कथा और सामूहिक कार्यक्रम होते हैं। मोदक, लड्डू तथा प्रसाद चढ़ाया जाता है। अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी को शोभायात्रा सहित विसर्जन होता है—यह भगवान का अपने धाम लौटना और “गमते गजानन—पुढच्या वर्षी लवकर या” (अगले वर्ष शीघ्र पधारिए) की भावपूर्ण कामना का प्रतीक है।

5) व्रत-पूजन की मान्यता

गणेश चतुर्थी के दिन गणपति व्रत एवं विशेष पूजन करने से सुख-समृद्धि, मनोकामना-सिद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति मानी जाती है। श्रद्धालु गणेश अथर्वशीर्ष, गणपति स्तोत्र और “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष के साथ आशीर्वाद का अर्जन करते हैं।

6) सांस्कृतिक व सामाजिक पक्ष

  • धार्मिक भावना के साथ कला, संगीत, नाटक, प्रदर्शनी व सामाजिक संदेशों का मंच।
  • समुदाय-निर्माण: जाति-धर्म से ऊपर उठकर सहभागिता व सेवा की भावना।
  • दान, रक्तदान, स्वच्छता, शिक्षा-जागरूकता जैसी लोककल्याण गतिविधियाँ।

7) आधुनिक समय और पर्यावरण

विदेशों में बसे भारतीय समुदाय—मॉरीशस, थाईलैंड, फिजी, कनाडा, अमेरिका आदि—भी गणेशोत्सव को पूरे उत्साह से मनाते हैं। पर्यावरण चेतना के कारण इको-फ्रेंडली (मिट्टी/प्राकृतिक रंगों से बनी) मूर्तियों का प्रचलन बढ़ा है, साथ ही कृत्रिम तालाब, बीज-गणपति और प्लास्टिक-रहित सजावट जैसे प्रयास जल-जीवों की रक्षा का संदेश देते हैं।

8) सार

गणेश चतुर्थी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, ज्ञान और सामाजिक एकता का उत्सव है। यह हमें सिखाती है कि हर शुरुआत सकारात्मकता और ईश्वरीय स्मरण से होनी चाहिए। गणेश जी के आशीर्वाद से हम जीवन के विघ्नों को परास्त कर सिद्धि की ओर अग्रसर होते हैं—यही इस उत्सव का शाश्वत संदेश है।

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